Rajendra Prasad Biography Hindi: राजेंद्र प्रसाद भारतीय लोकतंत्र की विरासत

Rajendra Prasad Biography Hindi
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Rajendra Prasad Biography Hindi: राजेंद्र प्रसाद भारत के प्रथम राष्ट्रपति थे। राजेंद्र प्रसाद का जन्म बिहार के सारण जिले में गांव जीरादेई में हुआ था। राजेंद्र प्रसाद की माता का नाम कमलेश्वरी देवी और पिता का नाम महादेव सहाय था। राजेंद्र प्रसाद भारतीय राजनीति में सबसे सक्रिय राजनेताओं में से एक थे।

राजेंद्र प्रसाद अपने परिवार में सबसे छोटे होने के कारण परिवार में सबसे अधिक लाडले भी थे। राजेंद्र प्रसाद की प्रारंभिक शिक्षा बिहार के ही छपरा जिले में हुई। राजेंद्र प्रसाद अपने घर में माता और दादी के काफी लाडले थे। राजेंद्र प्रसाद का विवाह महज तेरह वर्ष की उम्र में हो गई थी। प्रथम राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद की पत्नी का नाम राजवंशी देवी था।

Rajendra Prasad Biography Hindi: कलकत्ता विश्वविद्यालय से एलएलएम में स्वर्ण पदक हासिल किया

शादी के बाद उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी और पटना के टी.के.घोष अकादमी से पढ़ाई पूरी की और बिहार के भागलपुर में फिर लॉ की पढ़ाई पूरी की। बाद में राजेंद्र प्रसाद ने कलकत्ता विश्वविद्यालय से 1915 में एलएलएम की डिग्री हासिल की। एलएलएम में उन्हें स्वर्ण पदक से नवाजा गया। इसी विषय से उन्होंने डॉक्टरेट की डिग्री भी ली।

Rajendra Prasad को हिन्दी से था बहुत प्यार

राजेंद्र बाबू को हिंदी बहुत अधिक प्रिय थी। वे हिन्दी भाषा के बहुत प्यार करते थे। इसके अलावा वे अंग्रेजी, उर्दू, फारसी, बंगाली और साहित्यिक भाषा से पूरी तरह से परिचित थे। उनके लेख जानी-मानी हिन्दी पत्र-पत्रिकाओं में छपते रहते थे। उन्हें गुजराती भाषा का भी ज्ञान था। लेकिन उन्हें सबसे प्रिय हिन्दी ही लगती थी।

Rajendra Prasad Biography Hindi: गांधी जी प्रभावित होकर कलकत्ता विश्वविद्यालय के सीनेटर पद का परित्याग किया

राजेंद्र प्रसाद के पिता संस्कृत के बड़े विद्वान हुआ करते थे। हिन्दी पत्रिकाओं में राजेंद्र प्रसाद के लेख छपा करते थे, जिनमें से भारत मित्र, भारतोदय, कमला आदि प्रमुख थे। राजेंद्र प्रसाद जब गांधी जी के संपर्क में आए तो वे गांधी जी से बहुत प्रभावित हुए। उन्होंने गांधी जी की निष्ठा, समर्पण एवं साहस से प्रभावित होकर कलकत्ता (कोलकाता) विश्वविद्यालय के सीनेटर पद का परित्याग कर दिया।

राजनीति में प्रवेश करने के बाद राजेंद्र प्रसाद गांधी जी के साथ मिलकर आजादी की लड़ाई में अपना महत्वपूर्ण योगदान देने लगे। राजेंद्र प्रसाद ने गांधी जी द्वारा विदेशी संस्थाओं के बहिष्कार के समय खूब बढ़-चढ़कर जनसेवा का कार्य किया था। राजेंद्र प्रसाद अपने शुरुआती दिनों में पटना में प्रसिद्ध वकील हुआ करते थे। हालांकि बाद में उन्हें सारी सुख-सुविधाओं का त्याग कर दिया और साधारण बनकर रहने लगे।

Rajendra Prasad 1934 में कांग्रेस अध्यक्ष चुने गए : Rajendra Prasad Biography Hindi

राजेंद्र बाबू 1934 में कांग्रेस के अध्यक्ष चुने गये। वे 1939 में पुन: अध्यक्ष चुने गए। भारत की स्वतंत्रता के बाद उन्हें भारत के प्रथम राष्ट्रपति होने का गौरव प्राप्त हुआ। भारत के राष्ट्रपति के रूप में उन्होंने 12 वर्षों तक देश की सेवा की। एक राष्ट्रपति के रूप में उन्होंने कभी भी प्रधानमंत्री या कांग्रेस को राष्ट्रपति के संवैधानिक अधिकारों में दखलअंदाजी का मौका नहीं दिया।

राष्ट्रपति के पद से रिटायर होने के बाद राजेंद्र प्रसाद पटना के सदाकत आश्रम में रहे। अपने जीवन के अंतिम पलों में भी वे पटना के सदाकत आश्रम में ही रहे। राजेंद्र प्रसाद की मृत्यु 28 फरवरी 1963 को हुई। राजेंद्र प्रसादी की जीवनी आज के युवाओं को काफी प्रेरित करने वाला है। उन्हें देश के प्रथम राष्ट्रपति के जीवनगाथा से सीख लेनी चाहिए और अपने जीवन में उनके आदर्शों को उतारना चाहिए।

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